जिया था मैंने भी कभी शुरुवात का कोई ठिखाना नहीं, अंजाम से भी हू बेखबर, एक जीवन हे जिसने जीना सिखाया, कौन जाने ! उन्हें ये हैं भी पता | दिन तोह आते रहते थे, रात तोह होही जाती थी…
जिया था मैंने भी कभी शुरुवात का कोई ठिखाना नहीं, अंजाम से भी हू बेखबर, एक जीवन हे जिसने जीना सिखाया, कौन जाने ! उन्हें ये हैं भी पता | दिन तोह आते रहते थे, रात तोह होही जाती थी…