I Too Lived Once

जिया था मैंने भी कभी

शुरुवात का कोई ठिखाना नहीं,
अंजाम से भी हू बेखबर,
एक जीवन हे जिसने जीना सिखाया,
कौन जाने ! उन्हें ये हैं भी पता |

दिन तोह आते रहते थे,
रात तोह होही जाती थी |
सूरज ना चाँद भी कभी आया,
उन्हें देखा तोह ही सब पाया |

हवा में सिर्फ खुशबु महकता,
कितना सरल एवम स्वच सब दीखता |
दुश्मन से दोस्ती का हाथ बढता,
माँ से कभी नहीं युही लड़ता |

जादू तोह उनकी आंखो ने कियाही था,
मगर असर तोह अभ होने लगा था |
एक मुस्कुराहट ने जीना सिखाया,
हर नए सुबह में उठना सिखाया |

उनके जुल्फे गालो को सदा न छूती,
कभी शीशा जादुई आंखो को ढका करती,
दोस्तोह के बीच शामको नजर जो मिलती,
बस रात की नींद तो अँधेरे में खो ही जाती |

असर ने मिलने के अन्होंके कारण बनाए,
दिलसे चुटकियो भर बाते हुई,
लेखिन और क्या कहू कैसे कहू,
जब कहा तोह सुना नहीं,
सुना तोह समजह नहीं,
और जब समझा तोह, हम थे नहीं |

इस मौसम में कुछ ना बदला,
बरसते बारिश में कुछ ना बीगा,
जलते दूप में भी कुछ ना सिमटा,
अगणित तारों ने कुछ भी ना माँगा,
सच तोह हैं, उन्होंने हमें जीना सिखाया |

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Posted in Poems
Thoughts

Sometimes,
to do,
to decide,
to stop,
& even to start,
we wait long,
and a little long,
till end comes by.
From now on,
"Regrets be no more ever again"

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